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अगर आपको लगता है कि सामने वाला झूठ बोल रहा है, तो इन बातों पर गौर करके आप पकड़ सकते हैं उसका झूठ

झूठ को लेकर ज़्यादातर लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग होती हैं. कुछ लोग झूठ को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर पाते वहीं कुछ लोग इसे लेकर सहनशील बने रहते हैं. लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि झूठ लगभग हर इंसान अपनी सुविधानुसार बोलता ही है. एक सर्वे के अनुसार, एक सामान्य व्यक्ति दिन में करीब छह झूठ बोलता है. झूठ हल्के हों या गंभीर, ये लोगों के ट्रस्ट का नुकसान करने का माद्दा रखते हैं और ऐसे में ये किसी को पसंद नहीं होते. कई विशेषज्ञों का भी मानना है कि बॉडी लैंग्वैंज और लोगों के हावभाव को नोटिस कर ये जाना जा सकता है कि सामने वाला व्यक्ति झूठ बोल रहा है या सच!

आमतौर पर झूठ बोलने वाले लोग, आंख मिलाने की कोशिश नहीं करते या फिर कुछ ज़्यादा ही आई कॉन्टेक्ट बनाने की कोशिश करते हैं. अगर कोई आपकी आंखों में देखकर कोई बात नहीं कह पा रहा है तो बहुत संभव है कि ये व्यक्ति आपसे झूठ कह रहा है.

झूठ पकड़े जाने पर अक्सर कई लोग झुंझला सकते हैं और अपनी बात को सच साबित करने के लिए आक्रामक हो सकते हैं.

कोई शख़्स अगर आपके साथ ईमानदारी नहीं बरत रहा है तो उसकी बॉडी लैंग्वेज में एक अजीब सी असहजता ज़रूर नोटिस कर पाएंगे. ये लोग अक्सर कई मौकों पर आपसे मुंह मोड़ लेते हैं.

बॉडी लैंग्वेज पर भी ध्यान देकर सामने वाले के झूठ को आसानी से पकड़ा जा सकता है. मसलन, तेजी से पलकें झपकाना, स्माइल कम हो जाना, हाथ बांध कर खड़ा होना, रक्षात्मक मुद्रा में आ जाना.

आमतौर पर झूठ बोलते समय लोग थोड़ा हकलाते हैं और संकोच करते हैं बशर्ते वे कोई प्रोफ़ेशनल एक्टर्स न हों.

झूठे लोग अक्सर सामने वाले शख़्स के शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सवाल का जवाब देने की भी कोशिश करते हैं.

झूठा व्यक्ति जल्दी ही रक्षात्मक मुद्रा में आ जाता है वहीं निर्दोष व्यक्ति मामले में बहस कर सकता है और आक्रामक मुद्रा अख्तियार कर सकता है.

झूठ बोलने के बाद लोग अक्सर मुख्य मुद्दे से हट बारीकियों पर ध्यान देकर लोगों को बरगलाने का काम करते हैं. जब लोग सच बोलना नहीं चाहते हैं तो वे अक्सर प्रासंगिक मुद्दे की जगह फ़ालतू प्वाइंट पर फ़ोकस शुरु कर सकते हैं.

कई बार नर्वस होने या झूठ बोलने पर लोग अपने चेहरे या बालों को छेड़ते हैं. ये तरीका किसी का झूठ पता लगाने के लिए काफी प्रभावी हो सकता है क्योंकि पूछताछ के दौरान ज़्यादातर मामलों में Subconsciously लोग ऐसा करते हैं और लोगों के झूठ की पोल खुल जाती है. 

अगर आपको लगता है कि कोई इंसान झूठ बोल रहा है तो बातचीत का टॉपिक जल्दी बदल दें. ऐसा होने पर इस बात के चांसेस अधिक हैं कि झूठा व्यक्ति इस बात से मन ही मन खुश हो और आपके इस फ़ैसले पर सहज रहे, वहीं सच्चा व्यक्ति इस बात से थोड़ा कंफ्यूज़ हो सकता है और आपके टॉपिक बदलने की बात का विरोध जता सकता है.

Source: Business Insider 

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