कहा जाता है चलते रहने का नाम जिंदगी है । आइए सिद्धांत नाम के लड़के की इस कहानी से इसको समझते है ।

सिद्धांत पिछले छह सालो से शहर में होने वाली मैराथन में भाग लेता था । लेकिन कभी भी वह रेस को पूरा नही कर पाया था।

इस साल भी मैराथन होने वाली थी । इस साल की मैराथन को लेके सिद्धांत बहुत उत्साहित था क्योंकि पिछले कई महीनों से वह रोज सुबह उठकर दौड़ने का अभ्यास कर रहा था । अतः वह आत्मविश्वास से भरा था । उसे विश्वास था कि इस साल का मैराथन वह जरूर पूरी करेगा ।

आखिरकार वह दिन आ गया जब मैराथन होने वाली थी । बंदूक की आवाज के साथ दौड़ की शुरुआत हुई । सब दौड़ने लगे । सिद्धांत भी तेजी से दौड़ रहा था ।

सिद्धांत का उत्साह चरम पर था वह बहुत तेजी से दौर रहा था । लेकिन जैसे ही वह आधे रास्ते तक पहुंचा वह इतना थक गया कि मन कर रहा था वही बैठ जाये ।

तभी उसने खुद को ललकारा । नही सिद्धांत तुम ऐसा नही कर सकते , तुम छह साल से इसके लिए मेहनत कर रहे हो ।ऐसे ही अपना परिश्रम व्यर्थ नही जाने दे सकते । तुम दौड़ नही सकते तो जॉग करो पर आगे बढ़ते रहो । और अब वह थोड़ी धीमी गति से आगे बढ़ने लगा ।

कुछ किलोमीटर ऐसे ही दौड़ने के बाद वह अब इतना थक चुका था कि एक कदम भी आगे बढाना भी मुश्किल लग रहा था । वह लड़खड़ाने लगा । उसके मन मे विचार आया बस अब यही रुक जाए ।

लेकिन एक बार और उसने खुद को समझाया । नही सिद्धांत तुम जॉग नही कर सकते तो कम से कम चलो लेकिन बढ़ते रहो , रुकना नही है ।

अब वह जॉग करने के बजाय चलते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने लगा ।

बहुत से लोग उससे आगे निकल चुके थे और जो पीछे थे वो भी आगे निकल रहे थे । सिद्धान्त चाह कर भी कुछ कर नही पा रहा था । चलते चलते सिद्धांत को फिनिशिंग पॉइंट दिखने लगा लेकिन तभी अचानक वह लड़खड़ा कर गिर पड़ा । उनके दाएं पैर में मोच आ गयी थी ।

सिद्धांत जमीन पर पड़ा था । उससे हिला भी नही जा रहा था । लेकिन उसने ठाना था कि आज रेस को पूरा करना ही है । वह लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ने लगा । और इस बार वह तब तक नही रुका जब तक उसने रेस को पूरा नही कर लिया ।

लाइन पार करते ही वह जमीन पर लेट चुका था । उसके आंखो में आंसू थे ।

उसने खुद को जिंदगी के आने वाले सभी रेस के लिए खुद को तैयार कर लिया था ।

चलते रहने की कला हमे किसी भी मंजिल तक पहुंचा सकती है । रुकावटो को देख कर दिल छोटा नही करना चाहिए ।

अगर घर में रिस्तेदारो के आने के वजह से आप 8 घंटे नही पढ़ सकते तो 2 घंटे ही सही पढ़िए जरूर ।

बारिश के वजह से आप 10 कस्टमर्स से नही मिल सकते तो 4 से ही सही , मिलिए जरूर ।

आप निश्चित ही विजयी होंगे ।

उम्मीद है ये पोस्ट आपके जिंदगी में ब्रह्मास्त्र साबित होगी । ऐसे ही पोस्ट के लिए ब्रह्मास्त्र से जुड़े ओर औरो को भी जोड़े । क्योंकि बदलाव की शूरुआत हमसे और आपसे ही होती है ।

आपका दिन शुभ हो !

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