हम सभी कभी ना कभी रिजेक्ट जरूर होते है , हाँ ये हो सकता है कि इसके प्रकार अलग अलग हो । खासकर अभी के समय मे जब प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा बढ़ गया है तो रिजेक्शन हमे झेलना ही पड़ता है ।आपका नसीब कितना भी अच्छा क्यों ना हो आपको कही न कही इसका सामना करना ही पड़ेगा । ये दुनिया बहुत बड़ी है और यहां करोड़ो लोग रहते है । इसलिए ये हमारी मुताबिक नही चलेंगी समय समय पर ये हमे निराशा में छोरे जाती है ।

अब जबकि ये हमारे जिंदगी का हिस्सा है और हर दिन किसी न किसी के साथ घटित होता है तो लाजमी है हमे ही रिजेक्शन को देखने का नजरिया बदलना पड़ेगा । जब हम रिजेक्ट होते है तो हमारे दिमाग मे तीन तरह के खयाल आ सकते है –

【1】मुझे विश्वास कर लेना चाहिए मैं एक हारा हुआ इंसान हूँ ।

【2】मैं सबसे अच्छा था , चुनना ही नही आता , मुझमे कोई कमी नही है । मैं उन्हें दिखाऊँगा मैं क्या क्या कर सकता हूँ । उन्हें अपने किये पर अफसोस जरूर होगा ।

【3】ये दुनिया बेकार है यहां भेदभाव होता है ।यहां के लोग गंदे है जो उन्होंने मेरे साथ ऐसा किया । उन्होंने मुझे कही का नही छोड़ा ।

मैं दावे के साथ कह सकता हूँ आपको भी रिजेक्शन झेलने के बाद इसी 3 प्रकार के ख्याल आते होंगे । अब आपको लगेगा कि इनमें तथ्य2 सही है । पर ऐसा नही है अगर हम खुद को ही सही मानेंगे तो हम अपनी गलतियों को नही देख पाएंगे और न उसमे सुधार कर पाएंगे ।

वैसे तो रिजेक्शन किसी उम्र में मिल सकता है लेकिन किशोरावस्था में मिला रिजेक्शन ज्यादा कष्टदायक होता है । ये उम्र में हम ज्यादा सपने देखते है , हमारा मन आशाओ से भरा होता है और मुख्य रूप से रिजेक्शन सहने लायक परिपक्व नही होते ।

उदाहरण के तौर पर आप किसी शिक्षक के नजर में अच्छा बनना चाहते है लेकिन कभी कभी ऐसा होता वो आपको नोटिस नही करते । या आप किसी लड़के या लड़की को अपना दोस्त बनाना चाहते है पर वो आपके संपर्क में आ ही नही पाता और आपका दिल टूटने लगता । आप सोचते है मैं इतना बुरा हूँ लोग मुझे नोटिस क्यों नही करते ।

पर ऐसा नही है लोगो की पसंद और रुचि अलग अलग होती है । लोग समान रुचि रखने वाले या अपने पसंद के अनुसार संपर्क बनाना चाहते है । कभी किसी मोड़ पर आपको ऐसा साथी मिल जाएगा जो आपमे इतना रुचि दिखायेगा जितना आप सोच भी नही सकते।

ये हमारे जिंदगी के कुछ विकासशील वर्ष होते है जिसमे हमारा मस्तिष्क परिपक्व होता है । और ये रिजेक्शन्स ही इसे परिपक्व बनाते है । यही तो है जो हमे हमे अपने कमियों से रुबरु करवाते है तथा इनमे सुधार करने का अवसर देते है ।

अगर आप रिजेक्शन से बचना चाहते है तो लोगो को संतुष्ट करने के लिए काम करना बंद करे । आप अपने मजबूत पक्ष को पहचाने तथा उसपे काम करे ऐसे में आपके रिजेक्ट होने की संभावना कम हो जाती है । और रिजेक्शन मिलती भी है तो ये सोचे कि ये सिर्फ मुझे ही नही मिली हर किसी को मिलती है । निराश हुए बगैर आप अपने कमियों पर विचार करे और प्रयास जारी रखे ।

उम्मीद है ये पोस्ट आपके जिंदगी में ब्रह्मास्त्र साबित होगी । ऐसे ही पोस्ट के लिए ब्रह्मास्त्र से जुड़े ओर औरो को भी जोड़े । क्योंकि बदलाव की शूरुआत हमसे और आपसे ही होती है ।

अपने विचार हमे कमैंट्स सेक्शन में जरूर बताएं । आपका दिन शुभ हो !

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