Monday, September 21, 2020
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शिष्टाचार – स्वामी विवेकानंद का प्रसंग

जब भी भारत के पवित्रता तथा अथाह ज्ञान से भरे इतिहास की बात की बात होती है तो विवेकानंद जी का नाम सबसे ऊपर आता है । उनका जीवन आज भी हम सब के लिए आदर्श है । उनके जीवन के हर पहलू से हमे कुछ न कुछ सीखने को मिलता है । अपने देश मे ही नही विदेशो में भी उनकी पहचान विद्वानों तथा अतुलनीय वक्ताओं में किया जाता है ।

स्वामी विवेकानंद के अनुसार –विश्व में ज्यादातर लोगो के असफलता का कारण यह है कि वह अपने अंदर समय पर साहस का संचार नही कर पाता और वे भयभीत हो उठता हैं।

स्वामीजी के द्वारा कही गयी सभी बातें उनके जीवन चक्र की घटनाओं में सजीव दिखाई देती हैं। उपरोक्त कथन को यू एस में स्थित शिकागो की एक घटना ने सही साबित कर दिया, किस तरह अत्यंत विपरीत परिस्थिती में भी उन्होने भारत को वहां जाकर गौरवान्वित किया। हमें अत्यंत गर्व महसूस होता है कि हम उस देश मे निवास करते हैं जहाँ स्वामी विवेकानंद जी जैसे महान और ज्ञानी संतो का मार्ग-दशर्न प्राप्त हुआ। आज आपके साथ उनके शिकागो यात्रा का रोचक वृतांत साझा कर रहा हूँ , जो भारतीय समाज मे समाहित शिष्टाचार से रूबरू करवाएगी ।

शिकागो में 1893 के वर्ष में विश्व धर्म सम्मेलन संचालित हो रहा था । स्वामी विवेकानंद भी उसमे हिंदुस्तान के तरफ से बोलने गए हुए थे । स्वामी जी का भाषण 11सितंबर को होना था। मंच पर रखे श्यामपट्ट पर लिखा हुआ था- हिन्दू धर्म – मुर्दा धर्म। कोई भी साधारण व्यक्ति इसे देखकर अपना आपा खो सकता था , पर स्वामी जी तनिक भी संकोच किये बिना बोलने के लिये खङे हुए और उन्होने अपने भाषण के शुरुआत में (अमरीकावासी बहनों और भाईयों) शब्दों के साथ लोगो को संबोधित किया। स्वामीजी के इन शब्दों ने वहां बैठे लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया, पूरी सभा ने तालियों की गरगराहट के साथ उनका स्वागत किया।

उनके इस उत्साह का कारण था, स्त्रियों को पहला स्थान देना। स्वामी जी ने सारी धरती को अपना परिवार मानकर सबका स्वागत किया था। भारतीय संस्कृति में निहित शिष्टाचार भरा अनोखा तरीका अभी तक किसी को नही सुझा था । उनके इस वक्तव्य का अत्यंत अच्छा प्रभाव पड़ा। श्रोता मंत्र मुग्ध होकर उनको सुनते रहे, निर्धारित 5 मिनट का समय कब चला गया किसी को आभास ही नही हुआ । सभा के अध्यक्ष कार्डिनल गिबन्स ने स्वामी जी से और आगे बोलने का अनुरोध किया। स्वामीजी बिना रुके 20 मिनट से भी अधिक समय तक बोलते रहे|

स्वामीजी के इस भाषण की खबर सारे अमेरिका में आग की तरह फैल गयी । देखते ही देखते हजारों की संख्या में लोग उनके शिष्य बन गए। और तो और, सभा में जब शोर मचता था तो यह कहकर श्रोताओं को शान्त कराना पड़ता था कि यदि आप चुप रहेंगे तो स्वामी विवेकानंद जी का आगे का भाषण सुनने का अवसर मिलेगा । यह सुनते ही सारी सभा शांत हो कर बैठ जाती।

अपने उस भाषण के द्वारा स्वामीजी ने यह साबित कर दिया कि हिन्दू धर्म भी अत्यंत श्रेष्ठ है, यह सभी धर्मो को अपने अंदर समाहित कर सकने की क्षमता रखता है। उन्होंने इस बात को सिद्ध किया कि भारतीय संस्कृति में किसी जाति या धर्म के लोगो का अपमान नही किया जाता । इस तरह स्वामी विवेकानंद ने इतने दूर जाकर विषम परिस्थितियों में भी भारतीयों का सर ऊंचा कर दिया । आज उस सभा अस्थल में उनके द्वारा कही गयी हर शब्द को अंकित किया है तथा उनकी मूर्ति भी लगाई गई है ।

उम्मीद है ये पोस्ट आपके जिंदगी में ब्रह्मास्त्र साबित होगी । ऐसे ही पोस्ट के लिए ब्रह्मास्त्र से जुड़े ओर औरो को भी जोड़े । क्योंकि बदलाव की शूरुआत हमसे और आपसे ही होती है ।

आपका दिन शुभ हो ।

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