Monday, September 21, 2020
Home Asli Story हनुमान जी का जन्म और नामाकरण

हनुमान जी का जन्म और नामाकरण

‘हनुमान’ यह शब्द हिन्दू धर्म मे एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है । इन्हें हिन्दू धर्म मे संकटमोचन के उपाधि से नवाजा गया है । कहा जाता है हनुमान ही एकमात्र जीवित देवता है जो पृथ्वी पर निवास करते है । आपने रामायण में इनके बहादुरी भरे कारनामे खूब सुने होंगे । आइए सबसे पहले जानते है इनका जन्म कैसे हुआ ।

हनुमान जी के माता का नाम अंजना था । वह पुत्र सुख से वंचित थी । उन्हें लालसा थी कि उनका भी एक पुत्र हो लेकिन कई जतन करने के बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी । अंततः थक हार कर वह मतंग ऋषि के शरण में पहुंची । उनको सादर नमस्कार कर अपनी पीड़ा बताई ।

मतंग ऋषि ने उनकी पीड़ा को सुनकर उन्हें उपाय बताया कि पप्पा सरोवर के पूरब दिशा में एक नरसिंहा आश्रम स्थित है ,उसकी दक्षिण दिशा में नारायण पर्वत के ऊपर स्वामी तीर्थ है आपको वहां पहुँचकर उसमें विधिपूर्वक स्नान करके, बारह वर्ष तक तप एवं उपवास करना पड़ेगा तब जाकर तुम्हें पुत्र सुख की प्राप्ति होगी।

अंजना मतंग ऋषि और पति केशरी की आज्ञा लेकर नारायण पर्वत का रुख किया और चल पड़ी । उन्होंने बारह वर्ष तक अखंड तपस्या किया तथा सिर्फ वायु का ही भक्षण किया । वायु देवता अंजना के इस तपस्या से बहुत प्रसन्न हुए । उन्होंने खुश होकर वरदान दिया और उन्ही के वरदानस्वरूप चैत्र शुक्ल की पूर्णिमा को अंजना को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। और इसिलए उनका पहला नाम वायुपुत्र पड़ा । उनके पिता केशरी ने उन्हें बजरंग बली का नाम दिया ।

यूं तो भगवान जी को अनेक नामों से पुकारा जाता है , परंतु उनका नाम हनुमान कैसे पड़ा इसके पीछे भी एक रोचक किस्सा है।

एक बार माता अंजना कुछ काम कर रही थी तभी हनुमान जी को भूख लग गयी वो कुछ खाने की जिद्द करने लगे । अंजना ने उनसे बोला ठीक है जाओ बगीचे से फल तोड़कर खा लो । हनुमान जी बगीचे में गए वहां भिन्न भिन्न प्रकार के फल थे ।

फलो का मुआयना करते करते उनकी नजर सूर्य पर पड़ी । वह उन्हें बड़ा आकर्षक लगा । वह उड़ते हुए गए और सूर्य को फल समझ कर निगल गए । पूरे संसार मे अंधकार हो गया । चारो ओर हाहाकार मच गया । सभी देवता हनुमान से आग्रह करने लगे कि वो सुर्य भगवान को छोड़ दे लेकिन हनुमान जी राजी न हुए ।

जब हनुमान जी ने किसी आग्रह को नही माना तो इंद्र देवता को हनुमान पर गुस्सा आ गया । उन्होंने अपने वज्र से वार कर दिया । हनुमान जी सीधे धरती पर आ कर गिरे । इन वज्रपात के कारण हनुमान जी का जबड़ा टूट गया ।

हनु का मतलब होता है जबड़ा और मान का मतलब होता है खंडित या विरूपति । तो आप को भी समझ आ ही गया होगा कि वायु पुत्र का नाम हनुमान कैसे पड़ा । तो ऐसे हुआ हनुमान जी का नामकरण ।

उम्मीद है ये पोस्ट आपके जिंदगी में ब्रह्मास्त्र साबित होगी । ऐसे ही पोस्ट के लिए ब्रह्मास्त्र से जुड़े ओर औरो को भी जोड़े । क्योंकि बदलाव की शूरुआत हमसे और आपसे ही होती है ।

आपका दिन शुभ हो !




LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

समस्याएं – सौ ऊंटो की कहानी

जीवन में कभी कभी हम चारो ओर से समस्याओं से घिर जाते हैं और फिर सोचते है ये हमारे साथ ऐसा क्यों...

सबसे कीमती चीज !

इस दुनिया मे सबसे कीमती चीज क्या है ? कुछ लोगो के अनुसार धन सबसे कीमती है तो कुछ लोगो के लिए...

हनुमान जी का जन्म और नामाकरण

'हनुमान' यह शब्द हिन्दू धर्म मे एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है । इन्हें हिन्दू धर्म मे संकटमोचन के उपाधि से नवाजा...

शिष्टाचार – स्वामी विवेकानंद का प्रसंग

जब भी भारत के पवित्रता तथा अथाह ज्ञान से भरे इतिहास की बात की बात होती है तो विवेकानंद जी का नाम...

Recent Comments